सूचना प्रौद्योगिकी के युग में तीव्रता से सम्पूर्ण विश्व एक वैश्वीकृत ग्राम का रूप धारण करता जा रहा है। इन बदलती हुई परिस्थितियों ने मानव समाज के सम्मुख अनेक चुनौतियों को उत्पन्न किया है। हमारा समाज भी इन चुनौतियों से अछूता नहीं है। भूमण्डलीकरण के वर्तमान परिदृश्य में हमारे सामाजिक एवं राष्ट्रीय जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मूल्यों एवं मान्यताओं में अभूतपूर्व परिवर्तन हो रहा है।

परम्परागत मूल्यों एवं मान्यताओं में परिवर्तन का प्रभाव शिक्षा तथा विशेष रूप से उच्च शिक्षा पर पड़ा है। शिक्षा मानव व्यक्तित्व के निर्माण में विनियोजन, तथा व्यक्ति के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के निर्माण एवं विकास की आधारशिला है। सर्वमान्य सत्य है कि ज्ञान-विज्ञान तथा वैश्वीकरण के इस दौर में एक शक्तिशाली एवं सर्वांग विकसित राष्ट्र के निर्माण में सर्वाधिक निर्णायक भूमिका शिक्षा जगत की ही है।