लक्ष्य:  शिक्षा मानव व्यक्तित्व के निर्माण में विनियोजन तथा व्यक्ति के माध्‍यम से समाज एवं राष्ट्र के निर्माण एवं विकास की आधारशिला है। सर्वमान्य सत्य है कि ज्ञान-विज्ञान तथा वैश्वीकरण के इस दौर में एक शक्तिशाली एवं सर्वांग विकसित राष्ट्र के निर्माण में सर्वाधिक निर्णायक भूमिका शिक्षा जगत की ही है। सामान्यतया उच्च शिक्षा ज्ञानार्जन, विश्लेषण, शोध और अनुप्रयोग की प्रविधियों से आकार पाती है, जिसके माध्यक से ज्ञान-विज्ञान से समृद्ध ऐसी पीढ़ी का निर्माण करना है जो उच्चतम मानवीय मूल्यों यथा समता, समरसता, धर्म निरपेक्षता पर कल्याण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवता आदि से युक्त हो। इन्ही उद्देश्यों की पूर्ति के लिये यह अपेक्षित एवं अपरिहार्य है कि समाज के युवा वर्ग को शिक्षण एवं प्रशिक्षण द्वारा उच्च कोटि का समाजोपयोगी प्राणी बनाया जाय।

दूरदर्शिता:  समानता एवं सभी लोगों की पहुंच में' के सिद्धांत पर आधारित गुणवत्तापूर्ण एवं नवोन्मुखी शिक्षा व्यवस्था जिसमे उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रत्येक स्टेक होल्डर एवं सभी कर्चारियों के हितो की रक्षा सुनश्चित हो।